भारत देश में उत्तरप्रदेश के जिला कासगंज में मौजूद है हमारा सोरों सूकरक्षेत्र तीर्थस्थल जिसकी मान्यता सालो से पुराणों में चली आरही है। हाल ही में सोरों को आधिकारिक तौर पर तीर्थस्थल का दर्जा उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा दिया गया। सोरों एक पौराणिक तीर्थ स्थल है यहाँ हमारी हिन्दू संस्कृति को रामचरितमानस देने वाले महानुभाव श्री तुलसीदास जी गोस्वामी का जन्म हुआ था। इसी कारण इसे संत तुलसी जन्म भूमि सोरों सूकरक्षेत्र भी कहा गया है ।
सोरों शूकरक्षेत्र जी को अपना नाम श्री वराह के अवतार पर मिला। भगवान विष्णु के तृतीया अवतार श्री वराह जी ने अपना शुद्धिकरण हमारे शूकरक्षेत्र की धरा पर आकर किया था। तीर्थस्थल में श्री वराह ने स्वयं अपने हाथों से धरती से जल को निकाला और आज वही एक कुंड के रूप में हमारे तीर्थस्थल में स्थापित है। यहाँ भारत के बहुत से प्रदेशो से यात्री आते है और अपने परिवारीजनों का अस्थि विषर्जन कर विधि विधान से पिंडदान करते है। तीर्थस्थल के इस कुंड को हरी की पौड़ी के नाम से जाना जाता है। हरी की पौड़ी सोरों जी में यह मान्यता है की यहाँ जो अस्थियां विषर्जित की जाती है वह अस्थियां ७२ घंटों के पश्चात जल में विलय हो जाती है।
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